गोहर में पीलिया प्रकोप पर अदालत सख्त, 12 अधिकारी और पंचायत सचिव बने प्रतिवादी
गोहर उपमंडल में पीलिया (हेपेटाइटिस A/E) के लगातार फैलते प्रकोप और प्रशासन की कथित लापरवाही के मद्देनजर सिविल जज गोहर की अदालत ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने बार एसोसिएशन गोहर द्वारा दायर जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया और सीपीसी की धारा 80(2) के तहत आवेदन को मंजूरी दे दी। इस फैसले से प्रशासनिक अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सुनवाई में बार एसोसिएशन गोहर के अधिवक्ता नवनीत वशिष्ठ के नेतृत्व में पंकज वत्सी, अतुल शर्मा, तिलक ठाकुर और डी.के. ठाकुर ने अदालत में जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि खुले में कचरा फेंकना और दूषित पानी के चलते पीलिया फैलना गंभीर मामला है और इसके लिए तुरंत एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
अदालत ने मामले में 12 अधिकारियों और पंचायत सचिवों को प्रतिवादी बनाया है। इनमें प्रमुख हैं: प्रधान सचिव जल शक्ति विभाग, डिप्टी कमिश्नर मंडी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी, अधिशासी अभियंता जल शक्ति विभाग डिवीजन बग्गी, सहायक अभियंता जल शक्ति विभाग गोहर, खंड विकास अधिकारी गोहर, और गोहर क्षेत्र की आठ पंचायतों के सचिव।
सुनवाई के दौरान जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता किशन कुमार शर्मा, बीएमओ बगस्याड डॉ. राकेश रोशन भारद्वाज और बीडीओ गोहर सरवन कुमार सहित संबंधित पंचायत सचिव भी अदालत में मौजूद रहे। अदालत ने सभी प्रतिवादियों से दो दिन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया और पंचायत सचिवों को हर सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
गोहर क्षेत्र में दूषित पानी और कचरा डंपिंग के कारण अब तक 240 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं और दो लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोग प्रशासन पर दबाव डाल रहे हैं कि स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
मुकदमे की अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को होगी। अदालत के सख्त निर्देशों से उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा और क्षेत्र में स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति सुधरेगी।
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