बिजली बोर्ड में फर्जी प्रमाणपत्रों से नौकरी पाने का मामला, पूर्व जेई समेत तीन पर केस दर्ज
चंबा। ( गोहर मंडी अपडेट्स) हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में फर्जी शैक्षणिक और तकनीकी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। मामले में विजिलेंस ने पूर्व कनिष्ठ अभियंता (जेई) समेत तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान तीनों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। संबंधित शिक्षण संस्थानों ने सत्यापन में इनके नाम से प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार किया है।
विजिलेंस जांच के अनुसार, खणी निवासी अनिल कुमार वर्ष 2022 में बिजली बोर्ड के होली उपमंडल में कनिष्ठ अभियंता के पद पर नियुक्त हुए थे। उन्होंने नियुक्ति के दौरान कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा प्रस्तुत किया था। जब इस डिप्लोमा का सत्यापन करवाया गया तो विश्वविद्यालय ने उनके नाम से ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार कर दिया।
दूसरे मामले में चंबा के देहरा गांव निवासी दिवेश कुमार वर्ष 2021 में बिजली बोर्ड के चंबा मंडल में जूनियर टी-मेट के पद पर नियुक्त हुए थे। उन्होंने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल जयपुर से दसवीं कक्षा का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। सत्यापन के दौरान संस्थान ने उनके नाम से प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि नहीं की।
वहीं, बालू निवासी विशाल कुमार वर्ष 2019 में बिजली बोर्ड के डलहौजी मंडल में जूनियर टी-मेट नियुक्त हुए थे। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) नोएडा का दसवीं कक्षा का प्रमाणपत्र दिया था। जांच में यह प्रमाणपत्र भी अप्रमाणिक पाया गया।
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। प्रमाणपत्रों के संदिग्ध होने की जानकारी मिलने के बावजूद बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने आपराधिक कार्रवाई के लिए जांच एजेंसी को सूचित नहीं किया। ऐसे अधिकारी भी अब विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं।
उधर, प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठने के बाद बिजली बोर्ड प्रबंधन ने विभागीय कार्रवाई करते हुए अनिल कुमार और विशाल कुमार चौहान को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था, जबकि दिवेश कुमार का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया था। अब विजिलेंस थाना चंबा में तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगामी जांच की जा रही है।
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